नौकरी और परिवार के बीच खुद को फिट कैसे रखें? मेरा 96 से 75 किलो का सफर
नौकरी और परिवार के बीच खुद को फिट कैसे रखें? मेरा 96 से 75 किलो का सफर
क्या कभी आपको लगता है कि आप अपनी ही उलझनों और जिम्मेदारियों के बीच कहीं खो गए हैं?
हम सब जीवन की भागदौड़ में कभी न कभी थक जाते हैं।
काम का प्रेशर, घर-परिवार का दबाव और समय की कमी—इन सबके बीच हम अक्सर खुद को, यानी अपनी सेहत और फिटनेस को पीछे छोड़ देते हैं।
मुझे यह ब्लॉग लिखने की प्रेरणा कैसे मिली?
यह ब्लॉग किसी बड़ी उपलब्धि का बखान करने के लिए नहीं है।
यह उन लोगों के लिए है जो आज भी खुद को जिम्मेदारियों के बोझ में दबा हुआ महसूस करते हैं।
जब मैं 96 किलो का था, तब मुझे लगता था कि शायद अब कुछ नहीं बदल सकता।
लेकिन जब मैंने खुद में बदलाव महसूस किया, तो मुझे अहसास हुआ कि हममें से बहुत से लोग बस एक 'सही दिशा' और 'थोड़ी सी हिम्मत' के इंतजार में हैं।
मुझे प्रेरणा मिली उन लोगों को देखकर जो काम के तनाव में अपनी सेहत को भूल चुके हैं।
मैंने यह ब्लॉग इसलिए लिखा ताकि आप जान सकें कि अगर मेरी जैसी साधारण शुरुआत से बदलाव आ सकता है, तो आपके जीवन में भी यह मुमकिन है।
याद रखिए, आप अकेले नहीं हैं; हम सब एक ही सफर में हैं।
19 साल की उम्र और वो लंबा अंतराल
जब मैं 19 साल का था, तब रनिंग और एक्सरसाइज मेरी दिनचर्या का सबसे अहम हिस्सा थीं।
मुझे दौड़ना वाकई बहुत पसंद था। वह रनिंग मुझे एक अलग तरह की खुशी और ऊर्जा देती थी।
2 साल तक वह रूटीन बहुत अच्छी तरह चला।
फिर जीवन ने करवट ली।
शादी हुई, बच्चे हुए और घर-परिवार की नई जिम्मेदारियां कंधों पर आईं।
करियर के साथ-साथ उन जिम्मेदारियों को निभाते हुए कब 10 साल बीत गए, पता ही नहीं चला।
इन 10 सालों के बीच मैंने 2-3 बार कोशिश की थी कि फिर से फिट हो जाऊं। कभी 10 दिन रनिंग की, तो कभी 15 दिन एक्सरसाइज।
कभी-कभी तो एक महीने तक भी किया, लेकिन वह सिर्फ मेरी 'कोशिश' थी, मेरा 'रूटीन' नहीं। मैं उसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा नहीं बना पाया, इसलिए उन प्रयासों का शरीर पर कोई स्थायी असर नहीं पड़ा।
धीरे-धीरे वजन 96 किलो तक पहुँच गया और शरीर भारी होने के साथ-साथ हिप जॉइंट में तकलीफ शुरू हो गई।
जब यह तकलीफ शुरू हुई, तो मैं सीधा थेरेपिस्ट के पास गया।
उस थेरेपी सत्र में जाने के बाद ही मुझे शरीर के विज्ञान की असली समझ मिली।
शरीर का विज्ञान: थेरेपी और ब्लड सर्कुलेशन का महत्व
थेरेपी सत्र में मुझे यह समझ मिली कि हमारा शरीर एक मशीन की तरह है।
अगर शरीर में ब्लड सर्कुलेशन (रक्त संचार) धीमा पड़ जाए, तो अंगों तक रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता।
जब अंगों को सही पोषण नहीं मिलता, तो वे सुस्त पड़ने लगते हैं और बीमारियां घर करने लगती हैं।
उस दिन मुझे समझ आया कि दौड़ना या मेहनत करना सिर्फ वजन कम करने के लिए नहीं है।
इसका असली मकसद शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाना है, ताकि हर अंग को सही पोषण मिले और वह फिर से जीवंत हो सके।
शुरुआत: बस एक कदम से
उस समझ के बाद, मैंने 33 साल की उम्र में फिर से शुरुआत की।
इस बार मैंने खुद पर कोई दबाव नहीं डाला।
मेरा लक्ष्य कोई रेस जीतना नहीं था, बस खुद को रोज का समय देना शुरू किया।
पहले 6 महीने सिर्फ पैदल चलने (Walking) का नियम रखा।
शुरुआत में चलना भी दर्दनाक था, पर धीरे-धीरे शरीर उस रूटीन के साथ ढलने लगा।
वो 6 महीने बहुत कीमती थे। पैर की तकलीफ कम होने लगी और शरीर में हल्कापन महसूस होने लगा।
जब शरीर तैयार हुआ, तब मैंने धीरे-धीरे अपने वर्कआउट की अवधि बढ़ाई।
आज मैं 35 साल का हूँ, वजन 75 किलो है और हिप जॉइंट की समस्या भी लगभग ना के बराबर है।
"फिटनेस की शुरुआत अपनी सुविधा के अनुसार कहीं से भी की जा सकती है। यदि आप व्यस्त दिनचर्या के कारण जिम नहीं जा पा रहे, तो घर से ही अपनी फिटनेस जर्नी शुरू करें। मैंने खुद घर पर रहकर कैसे फिटनेस हासिल की, यहाँ जानें: फिटनेस का असली सच: जिम और घर पर वर्कआउट का सही संतुलन
https://www.theniteshblogs.com/2026/07/fit-without-gym.html?m=1
वर्कआउट का वो एक घंटा: जो मुझे सिखाता ह
| "अनुशासन ही सफलता की कुंजी है।" |
कई बार जब मैं ठहरकर सोचता हूँ कि यह बदलाव कैसे आया, तो मुझे उत्तर में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं, बल्कि वो एक घंटा दिखता है जो मैं खुद को देता हूँ।
जब मैं रनिंग करता हूँ, तो मेरा पूरा ध्यान बस मेरी सांसों पर होता है।
दौड़ते समय सांसों की गति इतनी तीव्र होती है कि उन पर ध्यान लगाना और उन्हें महसूस करना बहुत आसान हो जाता है।
उस दौरान शरीर चाहे थका हो या कहीं दर्द हो, जैसे ही मैं अपनी सांसों की उस लय को देखता हूँ, सारी थकान और बाहरी उलझनें पीछे छूट जाती हैं।
उस वक्त ऐसा लगता है कि 'अभी, इसी पल' में जीना ही मानसिक शांति के लिए सबसे जरूरी है।
वह एक घंटा मुझे पूरे दिन के लिए तैयार करता है।
यह कोई चमत्कार नहीं, बस एक अनुशासित रूटीन है।
इस निरंतरता ने मुझे वह आधार दिया है, जिससे मैं अपने रोज के संघर्षों और चुनौतियों का डटकर सामना कर पाता हूँ।
मैं अपने वर्कआउट रूटीन को पूरी निरंतरता के साथ निभाने की कोशिश करता हूँ, और यही निरंतरता ही मेरा असली लक्ष्य है।
एक छोटा सा सुझाव: खुद पर दबाव न डालें
मैं कोई बहुत बड़ा काम नहीं कर रहा हूँ।
मैं बस रोज खुद के लिए थोड़ा समय निकालता हूँ।
स्त्री और पुरुष दोनों ही, अपने-अपने स्तर से खुद को देखकर, अपनी फिटनेस की इस यात्रा से जुड़ें और अपनी शुरुआत करें।
अगर आप भी किसी परेशानी से जूझ रहे हैं—चाहे वो वजन हो, शारीरिक दर्द हो या तनाव—तो बस इतना कहूँगा: खुद पर दबाव मत डालिए।
बस एक छोटा सा कदम उठाइए। अगर दौड़ नहीं सकते, तो चलिए। अगर चल नहीं सकते, तो बस टहलिए।
धीरे-धीरे रास्ता अपने आप निकल आएगा।
जिंदगी में किसी भी चीज का अंत नहीं होता, यह तो बस एक लंबा सफर है।
आज आप जो भी महसूस कर रहे हैं, उसे स्वीकार कीजिए और बस अपनी सांसों पर ध्यान देकर थोड़ा सा आगे बढ़िए।
📝 एक जरूरी नोट (मेरी तरफ से):
33 से 35 साल के इस सफर में ऐसा कई बार हुआ कि पारिवारिक फंक्शन या काम के दबाव के कारण मेरा रूटीन टूटा।
शुरू में मुझे लगता था कि मेरी मेहनत बेकार हो गई, पर मैंने सीखा कि ये गैप आना सामान्य है। अगर आप किसी दिन वर्कआउट नहीं कर पाए, तो उसे दिल पर न लें।
साथ ही, वजन कम करने के लिए सिर्फ वर्कआउट ही नहीं, मेरी डाइट (खान-पान) का भी बहुत बड़ा योगदान रहा है।
मैंने अपने वर्कआउट के साथ-साथ डाइट को भी पूरी ईमानदारी से फॉलो किया। सही पोषण और मेहनत का यह तालमेल ही है जो असर दिखाता है। निरंतरता का मतलब 'परफेक्शन' नहीं है, बल्कि बस 'न रुकना' है।
बिना डाइटिंग वजन कैसे कम करें?आप इस विषय मे भी जानकारी हासिल कर सकते है नीचे दिए गए लिंक पर
https://nitesh71291.blogspot.com/2026/06/my-fitnees-blog.html?m=1
चलिए, एक-दूसरे की मदद करते हैं!
यह तो सिर्फ मेरी एक छोटी सी शुरुआत और अनुभव का एक हिस्सा है।
दोस्तों, अब मुझे आप अपनी राय दें।
अगर आप विस्तार से जानना चाहते हैं कि मेरा सटीक डाइट प्लान क्या था, मैंने कौन-कौन सी एक्सरसाइज कीं, और कैसे मैंने इसे अपनी व्यस्त दिनचर्या में फिट किया, तो मुझे कमेंट्स में जरूर बताएं।
क्या आपको लगता है कि मुझे अपने वर्कआउट और डाइट प्लान पर अगला ब्लॉग लिखना चाहिए?
आप मुझे कमेंट्स में अपनी राय दें। आपकी राय ही मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है!
लेखक के बारे में: मैं भी आप जैसा एक साधारण व्यक्ति हूँ जिसने अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी सेहत को प्राथमिकता देना सीखा है।
| "मेहनत के बाद का सुकून!" |
"फिटनेस के सफर में सही खान-पान का बहुत बड़ा हाथ होता है। यदि आप भी जानना चाहते हैं कि मैं अपनी व्यस्त दिनचर्या के बीच घर के बने साधारण भोजन से कैसे वजन घटाता हूँ, तो मेरा डाइट प्लान जरूर देखें: [Weight Loss Diet Plan in Hindi: मेरा घरेलू डाइट प्लान] (https://www.theniteshblogs.com/2026/07/weight-loss-diet-plan-hindi-part-2.html?m=1)"
📢 डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह ब्लॉग केवल प्रेरणा और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) का विकल्प नहीं है। यदि आप गंभीर शारीरिक चोट (जैसे हिप जॉइंट की समस्या) से जूझ रहे हैं, तो किसी योग्य विशेषज्ञ, डॉक्टर या थेरेपिस्ट से सलाह अवश्य लें।
"आपका सफर वाकई में मुश्किलों से भरा रहा है, लेकिन जिस तरह से आपने उनका सामना किया, वह हम सबके लिए एक सीख है।"
जवाब देंहटाएंइस ब्लॉक के जरिए आपको अगर किसी भी तरीके की सीख मिली हो तो यह मेरे लिए बहुत ही खुशी की बात है धन्यवाद
हटाएंइस ब्लॉक के जरिए आपको अगर किसी भी तरीके की सीख मिली हो तो यह मेरे लिए बहुत ही खुशी की बात है धन्यवाद
हटाएं"आपकी जर्नी वाकई कमाल की है! मुझे आपकी डाइट के बारे में और जानने में बहुत रुचि है। क्या आप अपने अगले ब्लॉग में अपनी डाइट जर्नी को कवर कर सकते हैं? बहुत अच्छा होगा!"
जवाब देंहटाएंधन्यवाद इस रविवार को मैं अपना डायट प्लान वाला ब्लॉग पोस्ट करने की पूरी कोशिश करूंगा
हटाएंAap ki Journey vaky kabile tharif hai Aapke is blog se hame yaha prerna mili hai ki chahe kitne bhi Busy ho fir bhi apne liye thoda Samay nlkalna chahiye
हटाएंबहुत-बहुत धन्यवाद! आपकी यह बात जानकर बेहद खुशी हुई। खुद के लिए थोड़ा सा समय निकालना ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
हटाएंआपकी इसी प्रेरणा को आगे बढ़ाते हुए, इस रविवार (Sunday) मैं अपना पूरा डाइट प्लान शेयर करने वाला हूँ कि मैं सुबह से रात तक क्या खाता था। आशा है वह भी आपको पसंद आएगा। जुड़े रहिए!"