Workout करते समय शरीर को Energy कहाँ से मिलती है? (आसान विज्ञान)

A fit Indian man exercising with dumbbells at home representing workout energy
वर्कआउट के दौरान शरीर ऊर्जा कैसे बनाता है, आइए इस आसान विज्ञान को समझें।

​Introduction

​शायद आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ हो—आप पूरे जोश के साथ दौड़ने गए या जिम में भारी डंबल उठाया, शुरुआत के 5-10 मिनट सब कुछ बहुत अच्छा लगा।

​लेकिन फिर अचानक सांस फूलने लगी, मांसपेशियां जवाब देने लगीं और ऐसा लगा जैसे शरीर की 'बैटरी' अचानक खत्म हो गई हो।

​नमस्ते, मैं नितेश हूँ। जब मैंने अपनी फिटनेस जर्नी शुरू की थी और अपना 20 kg वजन कम करने की राह पर था, तो अक्सर मेरे मन में यह सवाल आता था।

​कुछ दिन वर्कआउट में इतनी ऊर्जा कहाँ से आ जाती है और कुछ दिन 10 मिनट में ही शरीर क्यों थक जाता है?

​मैंने महसूस किया कि अगर हम यह समझ लें कि हमारा शरीर एक्सरसाइज के दौरान अपनी ऊर्जा कहाँ से लेता है, तो हम बिना थके लंबे समय तक वर्कआउट कर सकते हैं।

​इस लेख में हम इसी विज्ञान को बहुत ही आसान और व्यावहारिक भाषा में समझेंगे। ताकि अगली बार जब आप पसीना बहाएं, तो आपको पता हो कि आपके शरीर के अंदर असल में क्या चल रहा है।

​इस लेख में क्या जानेंगे?

  • ​कसरत के दौरान शरीर की असल ऊर्जा (ATP) क्या होती है?
  • ​ऑक्सीजन का हमारी ऊर्जा और स्टैमिना से क्या कनेक्शन है?
  • ​तेज कसरत और हल्की कसरत में शरीर अपना ईंधन कहाँ से लेता है?
  • ​कसरत के दौरान अचानक भयंकर थकान क्यों महसूस होती है?
  • ​अपनी रूटीन में इस जानकारी का फायदा उठाकर स्टैमिना कैसे बढ़ाएं?

​1. शरीर का असली पेट्रोल (ऊर्जा) : ATP (क्या, कैसे और क्यों?)

Man running with a glowing ATP molecule showing instant muscle energy
ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) शरीर की वह 'नकद ऊर्जा' है, जिसके बिना मांसपेशियां काम नहीं कर सकतीं।

​जब आप दौड़ते हैं या भारी वजन उठाते हैं, तो मांसपेशियों को सिकुड़ने और काम करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। आइए इसे 3 आसान सवालों से समझते हैं:

​A. ATP क्या है? (What)

विज्ञान की भाषा में शरीर की इकलौती रासायनिक ऊर्जा को ATP (Adenosine Triphosphate) कहा जाता है।

​बिना ATP के हमारी मांसपेशियां एक इंच भी नहीं हिल सकतीं।

​इसे एक रोजमर्रा के उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपके पास बहुत सारी प्रॉपर्टी अर्थात(फैट या चर्बी) है और बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट अर्थात (कार्बोहाइड्रेट) भी है।

​लेकिन अगर आपको बाजार से सब्जी खरीदनी है, तो आप प्रॉपर्टी या एफडी सीधे नहीं दे सकते। आपको नकद पैसा अर्थात (ATP) ही देना पड़ता है।

​ठीक इसी तरह, शरीर सीधे आपकी चर्बी या कार्ब्स से काम नहीं चला सकता। उसे फैट और कार्ब्स को तोड़कर पहले नकद पैसे अर्थात (ATP) में बदलना ही पड़ता है।

​B. यह कैसे बनता है? (How - ऑक्सीजन का रोल)

अब सवाल है कि यह नकद पैसा (ATP) बनता कैसे है? यहाँ काम आती है ऑक्सीजन (Oxygen)।

​जब आप अचानक बहुत तेज दौड़ लगाते हैं (भारी कसरत), तो शरीर बिना ऑक्सीजन का इंतज़ार किए तुरंत ATP बनाता है।

​लेकिन यह बहुत कम बनता है (सिर्फ 2 ATP) और जल्दी खत्म हो जाता है।

​वहीं, जब आप आराम से जॉगिंग करते हैं और गहरी सांसें लेते हैं, तो शरीर उस भरपूर ऑक्सीजन का इस्तेमाल करके 15 गुना ज्यादा मात्रा (30 ATP) में ऊर्जा बनाता है।

​जिससे आप बिना थके लंबा दौड़ पाते हैं।

​C. कसरत में इसकी जरूरत क्यों होती है और हम थकते क्यों हैं? (Why)

यह सबसे अहम सवाल है। असल में, आराम करते समय हमारे शरीर में बहुत ही कम ATP जमा होता है।

​जैसे ही आप कसरत शुरू करते हैं, आपकी मांसपेशियां अंधाधुंध ATP खर्च करना शुरू कर देती हैं। इसे कमाई और खर्च के नियम से समझें।

​जब तक शरीर नई ATP बनाने की स्पीड (कमाई), आपके द्वारा ATP खर्च करने की स्पीड के बराबर रखता है, तब तक आप नहीं थकते।

​लेकिन जैसे ही आप कसरत बहुत तेज कर देते हैं, ATP का खर्च, उसकी कमाई से बहुत ज्यादा हो जाता है।

​ऐसे में कोशिकाओं का 'एनर्जी चार्ज' (Energy Charge) गिर जाता है, मांसपेशियां जवाब दे देती हैं, और आप थक कर रुकने पर मजबूर हो जाते हैं।

​2. Workout शुरू करते ही क्या होता है? (ऊर्जा के 3 मुख्य स्रोत)

​हमारा शरीर बहुत स्मार्ट है। आप कितनी तेज कसरत कर रहे हैं, शरीर उसी हिसाब से अलग-अलग जगहों से ऊर्जा लेता है।

​इसे मैराथन धावक (धीरे और लंबा दौड़ने वाले) और स्प्रिंटर (100 मीटर तेज दौड़ने या भारी वजन उठाने वाले) के उदाहरण से समझते हैं:

Infographic showing three main energy sources during workout: Creatine Phosphate, Carbohydrates, and Fat
वर्कआउट की गति के अनुसार शरीर तुरंत ऊर्जा (क्रिएटिन), तेज ऊर्जा (कार्ब्स) या लंबे समय की ऊर्जा (फैट) का इस्तेमाल करता है।

  • ​शरीर की 'इमरजेंसी बैटरी' (अर्थात क्रिएटिन फॉस्फेट): जब एक स्प्रिंटर अचानक अपनी पूरी शक्ति से बहुत तेज दौड़ता है या आप जिम में अपनी पूरी ताकत से सबसे भारी वजन उठाते हैं, तो शरीर को 1 सेकंड के अंदर ऊर्जा चाहिए। ऐसे समय में मांसपेशियों में पहले से जमा इमरजेंसी बैटरी (अर्थात क्रिएटिन फॉस्फेट - Creatine Phosphate) काम आती है। यह तुरंत पावर देती है, लेकिन सबसे जल्दी खर्च होने वाली बैटरी है, जो मुश्किल से 10-15 सेकंड ही चलती है।

  • ​शरीर की 'रेगुलर बैटरी' अर्थात (कार्बोहाइड्रेट): जब आप 15 सेकंड से ज्यादा और तेज गति से कसरत करते हैं (जैसे लगातार भारी वजन उठाना), तो शरीर को लगातार ऊर्जा चाहिए होती है। ऐसे में शरीर अपनी रेगुलर बैटरी अर्थात (ग्लाइकोजन या कार्बोहाइड्रेट) को तेजी से तोड़कर ATP बनाता है। यह बैटरी आपको अच्छी खासी ऊर्जा देती है, लेकिन भारी कसरत में कुछ समय बाद यह "लो (Low)" होने लगती है।

  • ​शरीर का 'विशाल पावरबैंक या जनरेटर' अर्थात (फैट / चर्बी): अब बात करते हैं मैराथन धावकों की। जब आप आराम से जॉगिंग करते हैं या पैदल चलते हैं (जहाँ सांस बहुत तेज नहीं फूल रही होती), तब शरीर ज्यादा लंबे समय तक ऊर्जा देने वाले स्रोत का इस्तेमाल करता है। यानी शरीर अपने विशाल पावरबैंक अर्थात (चर्बी या Fat) का इस्तेमाल करता है। क्या आप जानते हैं कि एक औसत इंसान के शरीर में इस विशाल जनरेटर अर्थात (फैट) के रूप में 1,00,000 किलोकैलोरी से भी ज्यादा ऊर्जा जमा होती है?

​3. जल्दी थकान क्यों होती है? (The Crossover Concept)

Graph showing the crossover concept where carbohydrate usage increases and fat usage decreases with exercise intensity
जैसे-जैसे कसरत तेज होती है, शरीर फैट (पावरबैंक) छोड़कर कार्बोहाइड्रेट (रेगुलर बैटरी) जलाने लगता है।

​इसे ध्यान से समझें। जब कसरत हल्की होती है, तो शरीर विशाल पावरबैंक अर्थात (फैट) का इस्तेमाल करता है।

​लेकिन जैसे-जैसे आप अपनी स्पीड या वजन बढ़ाते हैं (High Intensity), शरीर को तुरंत ऊर्जा चाहिए होती है।

​वह पावरबैंक को छोड़कर अचानक रेगुलर बैटरी अर्थात (कार्बोहाइड्रेट) पर निर्भर होने लगता है।

​विज्ञान में ऊर्जा बदलने की इस प्रक्रिया को Crossover Concept (क्रॉसओवर कॉन्सेप्ट) कहते हैं।

​चूंकि शरीर की यह रेगुलर बैटरी अर्थात (कार्बोहाइड्रेट) बहुत कम मात्रा में होती है, इसलिए भारी कसरत से जब यह खत्म होने लगती है, तो आपकी मांसपेशियां जवाब देने लगती हैं।

​यही कारण है कि आपको भयानक थकान महसूस होती है। दुनिया की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स मेडिसिन संस्था, American College of Sports Medicine (ACSM) के शोध भी यही बताते हैं कि भारी कसरत में शरीर का मुख्य ईंधन कार्बोहाइड्रेट ही होता है।

​4. व्यावहारिक समाधान (Practical Action): अब हमें क्या करना चाहिए?

​अब जब हम यह विज्ञान समझ गए हैं, तो आइए देखते हैं कि इसे अपनी रूटीन में कैसे लागू करें:

Fit man drinking water with banana and oats on table for pre-workout nutrition
भारी कसरत से पहले सही डाइट (कार्बोहाइड्रेट) और पर्याप्त पानी (हाइड्रेशन) लेना स्टैमिना बनाए रखने के लिए जरूरी है।

​सही डाइट (Nutrition):

अगर आप बहुत भारी वजन उठाने वाले हैं या तेज दौड़ लगाने वाले हैं, तो शरीर को अपनी रेगुलर बैटरी अर्थात (कार्बोहाइड्रेट) फुल चाहिए।

​कसरत से 40-50 मिनट पहले एक केला या थोड़ा ओट्स खा लें।

​अगर आप अपने खान-पान को लेकर कंफ्यूज रहते हैं, तो मेरा लेख वजन घटाने के लिए हेल्दी डाइट प्लान: क्या खाएँ, कितना खाएँ और सही डाइट कैसे बनाएँ? आपको एक सही दिशा दे सकता है।

​हाइड्रेशन और तुरंत ऊर्जा (Hydration & Instant Energy):

अगर वर्कआउट के बीच में आपको अचानक थकान महसूस होती है, तो इसका मतलब है कार्बोहाइड्रेट कम हो रहा है।

​ऐसे में पानी में मिला हुआ एक अच्छा Electrolyte Sports Drink आपको तुरंत एनर्जी देता है और ब्लड शुगर को मेंटेन रखता है, जिससे आप अपना वर्कआउट पूरा कर पाते हैं।

​प्रोटीन और सप्लीमेंट्स (Protein, Creatine & Recovery):

भारी वजन उठाने वाले अक्सर अपनी इमरजेंसी बैटरी अर्थात (क्रिएटिन फॉस्फेट) को बढ़ाने के लिए एक अच्छी क्वालिटी का Creatine Monohydrate सप्लीमेंट लेते हैं, ताकि वे जिम में 1-2 रैप्स (Reps) एक्स्ट्रा निकाल सकें।

​दूसरी ओर, कसरत के दौरान प्रोटीन आपको ऊर्जा नहीं देता (यह मुश्किल से 5-15% ही काम आता है)।

​जब एक्सरसाइज से आपकी मांसपेशियां टूटती हैं, तो शरीर Protein Synthesis अर्थात (नई मांसपेशियां बनाने की प्रक्रिया) शुरू करता है।

​इस समय एक अच्छा Whey Protein आपके शरीर को तुरंत वो न्यूट्रिशन देता है, जो रिकवरी को तेज कर देता है।

​मानसिक रिकवरी (Mental Recovery):

अक्सर जिम में या दौड़ते समय हमारी थकान सिर्फ शारीरिक नहीं होती। दिनभर का स्ट्रेस, स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल और खराब आदतें हमारे नर्वस सिस्टम को थका देती हैं।

​अगर शरीर थका हुआ नहीं है लेकिन फिर भी मन कसरत करने का नहीं कर रहा, तो आपको समझना होगा कि रोजमर्रा की ये 5 आदतें आपकी मानसिक मजबूती को धीरे-धीरे कमजोर कर सकती हैं।

​अपने शारीरिक स्टैमिना के साथ-साथ अपने दिमाग को भी आराम दें। इसके लिए मानसिक शांति और मानसिक मजबूती के लिए डिजिटल डिटॉक्स क्यों ज़रूरी है? इसे पढ़कर आप अपने स्ट्रेस को मैनेज करना सीख सकते हैं।

Tired but happy man resting after workout showing the importance of post-workout recovery
बेहतर फिटनेस के लिए कसरत के बाद शरीर को सही न्यूट्रिशन, प्रोटीन और मानसिक आराम की बहुत जरूरत होती है।

महत्वपूर्ण बात (एक जरूरी रिमाइंडर):

यहाँ दिए गए ऊर्जा स्रोतों, ATP उत्पादन और अलग-अलग energy systems के योगदान को समझाने के लिए सामान्य वैज्ञानिक उदाहरण दिए गए हैं।

​वास्तविकता में इनका योगदान व्यक्ति की फिटनेस, एक्सरसाइज की intensity और duration, शरीर की स्थिति, nutrition और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

​इसलिए दिए गए प्रतिशत या समय को हर व्यक्ति और हर workout पर बिल्कुल निश्चित मानकर नहीं देखना चाहिए।

​Conclusion

​हमारा शरीर एक बहुत ही समझदार मशीन है। हल्की कसरत में वह विशाल पावरबैंक अर्थात (फैट) का इस्तेमाल करता है, भारी कसरत में रेगुलर बैटरी अर्थात (कार्ब्स) का, और शुरुआत के 10 सेकंड में इमरजेंसी बैटरी अर्थात (क्रिएटिन फॉस्फेट) का।

​इन सबके पीछे का मकसद सिर्फ एक है— ATP अर्थात (नकद ऊर्जा) बनाना।

​सही डाइट, सही रिकवरी और मानसिक शांति के साथ आप अपने शरीर की इस ऊर्जा प्रणाली को अपने हिसाब से बेहतर बना सकते हैं।

​FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

​1. क्या खाली पेट (Fasted Workout) कसरत करने से फैट ज्यादा जलता है?

हल्की कसरत (जैसे सुबह की साधारण सैर) के लिए खाली पेट रहना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि तब शरीर सीधा विशाल पावरबैंक अर्थात (चर्बी) का इस्तेमाल करता है। लेकिन अगर आप भारी कसरत कर रहे हैं, तो खाली पेट होने से आप जल्दी थक जाएंगे।

​2. वर्कआउट के बीच में अचानक एनर्जी खत्म हो जाए तो क्या करें?

यह इस बात का संकेत है कि आपके शरीर की रेगुलर बैटरी अर्थात (कार्बोहाइड्रेट) लो हो रही है। ऐसे में पानी में थोड़ा इलेक्ट्रोलाइट्स या स्पोर्ट्स ड्रिंक (Carb feeding) लेने से ब्लड शुगर तुरंत मेंटेन हो जाता है।

​3. क्या प्रोटीन खाने से कसरत के दौरान ऊर्जा मिलती है?

नहीं। कसरत के दौरान ऊर्जा के लिए प्रोटीन का इस्तेमाल बहुत ही कम (सिर्फ 5 से 15%) होता है। प्रोटीन का मुख्य काम कसरत के बाद आपकी टूटी हुई मांसपेशियों की मरम्मत करना और उन्हें बड़ा बनाना है।

​4. शुरुआत में बहुत जल्दी थकान क्यों हो जाती है?

शुरुआत में आपके शरीर के अंदर ऊर्जा बनाने वाली मशीनें (Mitochondria / माइटोकॉन्ड्रिया) कम होती हैं। लगातार कुछ हफ्तों तक कसरत करने से शरीर इन मशीनों की संख्या बढ़ा देता है और आपका स्टैमिना खुद-ब-खुद सुधर जाता है।

​आपसे एक सवाल (और मेरी ओर से एक छोटी सी मदद)

​क्या आपने कभी नोटिस किया है कि कुछ दिन आप बहुत आसानी से वर्कआउट पूरा कर लेते हैं और कुछ दिन बहुत जल्दी थक जाते हैं? नीचे कमेंट में अपना अनुभव जरूर शेयर करें।

​साथ ही, अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपकी अपनी दिनचर्या (Routine) और कसरत के हिसाब से आपको प्रोटीन या क्रिएटिन किस मात्रा में और कैसे लेना चाहिए, तो कमेंट में अपना सवाल जरूर लिखें। मैं पूरी कोशिश करूँगा कि आपको सही मात्रा और तरीका बता सकूँ!

​लेखक के बारे में

नमस्ते, मैं नितेश हूँ। मैंने अपनी फिटनेस जर्नी के दौरान रनिंग, होम वर्कआउट और हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनी रूटीन का हिस्सा बनाया और लगभग 20 kg वजन कम किया। एक्सरसाइज और वेल-बीइंग को गहराई से समझने के लिए मैंने University of Colorado Boulder का Science of Exercise कोर्स और Yale University का Science of Well-Being कोर्स भी पढ़ा है।

​मेरी इस फिटनेस जर्नी और कोर्स सर्टिफिकेट्स के बारे बारे में अधिक जानने के लिए आप मेरा 'About Me' पेज पढ़ सकते हैं। इस ब्लॉग के माध्यम से मैं अपने अनुभव और विश्वसनीय विज्ञान को सरल भाषा में आपके साथ साझा करता हूँ।

​Disclaimer: यह लेख केवल शैक्षणिक जानकारी के लिए है और चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आपको हृदय रोग या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो नई कसरत शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

​Affiliate Disclosure: इस लेख में कुछ एफिलिएट लिंक्स (जैसे प्रोटीन या क्रिएटिन सप्लीमेंट्स) शामिल हो सकते हैं। यदि आप इन लिंक्स के माध्यम से कुछ खरीदते हैं, तो इससे आपको कोई अतिरिक्त लागत नहीं आती, लेकिन हमें ब्लॉग को चलाने के लिए थोड़ा सपोर्ट मिल जाता है।

टिप्पणियाँ

  1. ​साइंटिफिक रिसर्च और अपने व्यक्तिगत अनुभवों को मिलाकर जिस सहजता से आप समझाते हैं, वह वाकई काबिले तारीफ है। इस ब्लॉग को पढ़कर अब यह साफ समझ आ गया है कि सही एनर्जी लेवल बनाए रखने के लिए टाइमिंग और डाइट कितनी जरूरी हैं। ऐसे ही बेहतरीन और इंफॉर्मेटिव ब्लॉग्स लिखते रहिए!

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